नटराज का शब्दिक अर्थ है नृत्य सम्राट| नटराज रूप धारण करके शिव रचना करने वाला, रक्षक और विनाशक तीनों भूमिका दर्शाते हैं, भगवान शिव के नटराज स्वरूप के उत्पति का सम्बंध ‘आनंदम तांडव’ से है| हम सभी ने भगवान शिव को नटराज स्वरूप में एक बोनें राक्षस के ऊपर
नृत्य करते हुए देखा है| नटराज की इस मुद्रा में उस बौने राक्षस को
अज्ञानता का प्रतीक माना गया है और इस अज्ञानता पर बिजय प्राप्त करने के लक्ष्य को
‘आनंदम तांडव’ कहा जाता है |
भगवान शिव के नटराज रूप में उनके कंधे के समीप बाईं और अग्नि
प्रज्वलित दिखाए देती हैं, इसे विनाश का प्रतीक कहा जाता है | इस अग्नि का
अर्थ है अपने अंहकार को जला के भस्म कर देना | भगवान शिव का
उठा हुआ एक हाथ और एक पैर स्वतंत्रता का प्रतीक हैं | भगवान
शिव का लयबद्ध होकर नृत्य करना और अपनी गति में रहना दर्शाता है कि जीवन में गति
होना जरूरी है पर गति भी लय में हो तभी नियंत्रित रहती है |
Art by Santosh Kumar Maurya
Medium:- Acrylic
Size:-18 x 22 cm
Artwork :- Original

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